सर्वेयर कार्यक्रम (Surveyor Program) — नासा का ऐतिहासिक मून मिशन
सर्वेयर कार्यक्रम नासा द्वारा चलाया गया एक ऐतिहासिक मिशन था, जिसमें जून 1966 से जनवरी 1968 के बीच सात रोबोटिक यान चाँद की सतह पर भेजे गए। इसका मुख्य उद्देश्य चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग की तकनीक को सिद्ध करना था। ये अमेरिका के पहले ऐसे यान थे जिन्होंने किसी अन्य खगोलीय पिंड (चाँद) की सतह पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की।

मुख्य उद्देश्य और विशेषताएँ
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मूल लक्ष्य:
चाँद पर सुरक्षित सॉफ्ट लैंडिंग की तकनीक विकसित करना। -
तकनीकी उपलब्धियां:
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मिडकोर्स करेक्शन (उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता) का प्रदर्शन
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लैंडिंग साइट्स की उपयुक्तता जाँचना (भविष्य के क्रू मिशन के लिए)
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चाँद की मिट्टी और सतह का यांत्रिक एवं रासायनिक अध्ययन
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सॉफ्ट लैंडिंग के लिए थ्रोटलेबल इंजन, रडार, और टर्मिनल डीसेंट कंट्रोल सिस्टम का परीक्षण
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मिशन विवरण
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सात में से पाँच यान सफलतापूर्वक चाँद पर उतरे
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Surveyor 1, 3, 5, 6, और 7: सफल सॉफ्ट लैंडिंग
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Surveyor 2 और 4: तकनीकी खराबी के कारण मिशन असफल
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सभी यान चाँद पर ही रह गए, उन्हें वापस नहीं लाया गया। केवल Surveyor 3 के कुछ हिस्से Apollo 12 से पृथ्वी पर लाए गए।
लैंडिंग व लॉन्च जानकारी
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प्रत्येक मिशन में Hughes Aircraft Company द्वारा तैयार किए गए एक यान (spacecraft) का उपयोग किया गया।
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लॉन्च व्हीकल: Atlas-Centaur
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यात्रा: पृथ्वी से सीधे चंद्र सतह के लिए (चंद्र कक्षा में नहीं घूमाया)
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यात्रा समय: 63-65 घंटे (लगभग 2.6 से 2.7 दिन)
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उतरते समय मुख्य रॉकेट 75 किलोमीटर की ऊँचाई पर 40 सेकंड तक चलकर करीब 110 m/s गति तक रफ्तार घटाता, फिर बाकी रास्ता तीन छोटे इंजन से नियंत्रित लैंडिंग।
प्रमुख मिशन:
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Surveyor 1 (1966):
पहली सफल लैंडिंग, Oceanus Procellarum क्षेत्र में, बहुत सी तस्वीरें व डेटा भेजा। -
Surveyor 2 (1966):
मिडकोर्स करेक्शन फेल होने से क्रैश हो गया। -
Surveyor 3 (1967):
Mare Cognitum में लैंडिंग, 6,000+ तस्वीरें, और Surveyor 3 का कैमरा बाद में Apollo 12 द्वारा पृथ्वी पर लाया गया। -
Surveyor 4 (1967):
अंतिम क्षणों में संपर्क टूट गया, संभवत: सतह पर क्रैश। -
Surveyor 5 (1967):
Mare Tranquillitatis में सफल लैंडिंग, कई वैज्ञानिक परीक्षण। -
Surveyor 6 (1967):
Sinus Medii में उतरा, और पहली बार चाँद से टेक-ऑफ करने का प्रयास किया और 12 फुट की “हॉप” लगायी। -
Surveyor 7 (1968):
Tycho क्रेटर के पास लैंडिंग, विविध वैज्ञानिक निरिक्षण, लेज़र बीम भी परीक्षण हुए।
विज्ञान में योगदान
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सर्वेयर मिशनों ने चंद्रमा की सतह की यांत्रिकता, मोटाई, रासायनिक संरचना और लैंडिंग के लिए आवश्यक सतह की मजबूती का पूरा पता लगाया।
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तस्वीरों और मिट्टी के परीक्षणों से अपोलो मिशनों के लिए सेफ लैंडिंग साइट्स चुनना संभव हुआ।
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सर्वेयर 1–7 की सफल इंजन कंट्रोल तथा रडार तकनीक आने वाले सभी मून व प्लेनेटरी लैंडिंग मिशनों की नींव बनी।

स्पेस रेस में भूमिका
सर्वेयर कार्यक्रम और सोवियत लूना कार्यक्रम लगभग समान समय पर थे। सर्वेयर 1 की लैंडिंग (जून 1966) लूना 9 (फरवरी 1966) के सिर्फ 4 महीने बाद हुई — इससे दोनों देशों की स्पेस टेक्नोलॉजी की बराबरी दर्शाई।
संक्षिप्त सूची
| मिशन | लॉन्च | परिणाम |
|---|---|---|
| Surveyor 1 | मई 1966 | Oceanus Procellarum में सफल लैंडिंग |
| Surveyor 2 | सितम्बर 1966 | क्रैश |
| Surveyor 3 | अप्रैल 1967 | Oceanus Procellarum में सफल लैंडिंग |
| Surveyor 4 | जुलाई 1967 | क्रैश (Touchdown से 2.5 मिनट पूर्व संपर्क टूट गया) |
| Surveyor 5 | सितम्बर 1967 | Mare Tranquillitatis में सफल लैंडिंग |
| Surveyor 6 | नवम्बर 1967 | Sinus Medii में सफल लैंडिंग व “हॉप” |
| Surveyor 7 | जनवरी 1968 | Tycho क्रेटर के पास सफल लैंडिंग |