सोवियत लूना कार्यक्रम : एक ऐतिहासिक सफर

सोवियत लूना कार्यक्रम : एक ऐतिहासिक सफर

1960 और 1970 के दशक में, सोवियत संघ ने लूना कार्यक्रम के तहत चंद्रमा की सतह और उसकी कक्षा का ऐतिहासिक अन्वेषण किया। यह कार्यक्रम चंद्रमा पर मानव रहित यान भेजने, सॉफ्ट लैंडिंग, नमूने लाने और रोवर्स चलाने जैसे महान कार्यों के लिए प्रसिद्ध है। इसने अमेरिका के स्पेस रेस में मुख्य भूमिका निभाई और विज्ञान जगत को ढेरों नये तथ्य दिए।

प्रमुख चरण एवं उपलब्धियां

  • लूना 1 (1959):
    पहला मानव निर्मित यान, जो चंद्रमा के पास से गुजरा और सूर्य की कक्षा में चला गया। यह पृथ्वी-मून सिस्टम को छोड़ने वाला पहला मानव निर्मित ऑब्जेक्ट बना।

  • लूना 2 (1959):
    लूना 2 पहला यान था जो नियंत्रित रूप से चंद्रमा की सतह पर गिरा। इसकी सफलता ने सोवियत संघ के नेतृत्व को मज़बूत किया।

  • लूना 3 (1959):
    लूना 3 ने पहली बार चंद्रमा के अदृश्य ‘फार साइड’ की तस्वीरें भेजीं। डिजिटल कैमरे के बिना, यह तस्वीरें ऑनबोर्ड डेवलप होकर पृथ्वी पर ट्रांसमिट हुईं।

  • सॉफ्ट लैंडिंग (लूना 9, 1966):
    लूना 9 ने पहली बार चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करके वहां की तस्वीरें पृथ्वी पर पहुंचाई।

  • नमूना वापसी मिशन:

    • लूना 16 (1970): सफलतापूर्वक 101 ग्राम चंद्र मिट्टी वापस लाई।

    • लूना 20 (1972): पर्वतीय इलाके से 50 ग्राम मिट्टी वापस लाई।

    • लूना 24 (1976): अंतिम सफल नमूना वापसी यान – 170 ग्राम चंद्र मिट्टी वापस लाई।

  • लूनाखोद रोवर (Lunokhod):

    • लूना 17 (1970): Lunokhod-1, पहली बार चंद्रमा पर रोबोटिक रोवर चला।

    • लूना 21 (1973): Lunokhod-2 में और भी उन्नत सिस्टम थे, जिसने 42 किमी तक सफर किया।

विरासत

लूना कार्यक्रम ने न केवल विज्ञान को, बल्कि आगे आने वाले मिशनों को भी दिशा दी। आज कई स्पेस एजेंसियां, खासकर आर्टेमिस प्रोग्राम, उन आंकड़ों का उपयोग कर रही हैं जिन्हें सोवियत लूना प्रोग्राम ने decades पहले एकत्र किया था।