स्पिट्ज़र स्पेस टेलीस्कोप: इन्फ्रारेड में छुपी ब्रह्मांड की अदृश्य सुंदरता
बहुत सा ब्रह्मांड—गैस और धूल के पर्दों के पीछे छुपा—मानव आंखों और पारंपरिक दूरबीनों के लिए अदृश्य है। 16 साल से ज़्यादा वक्त तक नासा का स्पिट्ज़र स्पेस टेलीस्कोप, यानी "आसमान में इन्फ्रारेड आंख," ऐसी ही छुपी हुई जगहों में झाँकता रहा। उसने तारों के जन्मस्थान, विचित्र गैलेक्सियों की रचना, और यहां तक कि दूरस्थ ग्रहों के वातावरण का रहस्य खोला। स्पिट्ज़र के सफल मिशन ने सितारों के जीवन-चक्र, ग्रहों की बनावट और जीवन की उत्पत्ति तक की समझ बदल दी।
एक क्रांतिकारी सपना: स्पिट्ज़र की शुरुआत

स्पिट्ज़र स्पेस टेलीस्कोप नासा के "ग्रेट ऑब्जरवेटरीज़" कार्यक्रम का चौथा स्टेप था, जिसमें उसका नाम शुरू में SIRTF (Space Infrared Telescope Facility) रखा गया था। 25 अगस्त 2003 को यह फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से डेल्टा II रॉकेट के साथ लॉन्च हुआ और बाद में खगोलशास्त्री लाइमन स्पिट्ज़र जूनियर के नाम पर रखा गया।
इसका डिज़ाइन बेहद आधुनिक था - सिर्फ 4.5 मीटर लंबा, 2.1 मीटर चौड़ा और वजन लगभग 950 किलोग्राम (एक छोटी कार से भी हल्का)| इसके 85 सेंटीमीटर के मुख्य दर्पण ने इन्फ्रारेड रोशनी को तीन प्रमुख वैज्ञानिक यंत्रों पर केंद्रित किया। लेकिन इसका असली कमाल उसकी कक्षा थी: पृथ्वी की बजाय यह सूर्य के चक्कर लगाते हुए पृथ्वी से लगातार दूर जाता रहा, जिससे न तो पृथ्वी की गर्मी का असर हुआ और न ही रोशनी की रुकावट आई।
स्पिट्ज़र के उपकरण: जो अदृश्य था, वो अब सामने आया

Infrared false-color image of the Helix Nebula, taken by the Spitzer Space Telescope, showing an eye-like structure and cometary knots .
स्पिट्ज़र के पास तीन प्रमुख वैज्ञानिक यंत्र थे, जो इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रम के विस्तृत हिस्से में काम करते थे:
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इन्फ्रारेड एरे कैमरा (IRAC): चार इन्फ्रारेड तरंगदैर्ध्य (3.6, 4.5, 5.8, 8 माइक्रॉन) पर तस्वीरें खींचता था—तारों के बनते क्षेत्र, युवा सितारों और यहां तक कि एक्सोप्लैनेट के वातावरण को देखने के लिए आदर्श।
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इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोग्राफ (IRS): खगोलीय पिंडों के स्पेक्ट्रा से उनकी रासायनिक बनावट और भौतिक दशाएं प्रकट करता था।
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मल्टीबैंड इमेजिंग फोटोमीटर फॉर स्पिट्ज़र (MIPS): लंबी इन्फ्रारेड तरंगों (24, 70, 160 माइक्रॉन) में तस्वीरें खींचने के लिए—धूल से भरी गैलेक्सी, धूमकेतु और बेहद ठंडे पार्श्व इत्यादि देखता था।
इन में से प्रत्येक को तरल हीलियम से ठंडा किया जाता था ताकि वे अपनी ही गर्मी का शोर न पैदा करें और बेहद धीमे संकेत पकड़ सकें।हीलियम खत्म होने पर 2009 से स्पिट्ज़र ने "वार्म मिशन" के तहत मुख्य रूप से IRAC के छोटे चैनल से विज्ञान जारी रखा और जनवरी 2020 में मिशन समाप्त हुआ।
मुख्य खोजें: ग्रहों से लेकर गैलेक्सी के किनारे तक
इन्फ्रारेड की नजर में पुरानी धूल और मैटर के बीच उभरते वैज्ञानिक रहस्य स्पिट्ज़र ने खोले।
एक्सोप्लैनेट और ग्रह प्रणाली
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एक्सोप्लैनेट के प्रकाश का पहली बार पर्दाफाश: स्पिट्ज़र पहली दूरबीन बनी जिसने हमारे सौरमंडल से बाहर किसी ग्रह का प्रकाश सीधे पकड़ा—यह खोज एक्सोप्लैनेट विज्ञान के लिए मील का पत्थर थी।
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TRAPPIST-1: स्पिट्ज़र ने ट्रैपिस्ट-1 सिस्टम का अध्ययन कर उसकी सात पृथ्वी जैसी ग्रहों की खोज में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई—तीन ग्रह उस क्षेत्र में हैं जहां तरल पानी मिल सकता है।
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एक्सोप्लैनेट के मौसम का नक्शा: स्पिट्ज़र ने पहली बार विशाल ग्रह के वातावरण में तापमान का नक्शा तैयार किया।
तारों और ग्रहों का जन्म
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तारकीय नर्सरी: स्पिट्ज़र ने उन क्षेत्र को उजागर किया जहां तारे और ग्रह जन्म लेते हैं, धूल से घिरे युवा सितारों के चारों ओर की डिस्क को देखा—ये भविष्य के ग्रह तंत्र के पालने हैं।
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कार्बनिक अणु: स्पिट्ज़र ने अंतरिक्ष की धूल में जीवन के लिए ज़रूरी जटिल कार्बनिक अणु खोजे, जिससे संकेत मिलता है कि जीवन के तत्व पूरी गैलेक्सी में फैले हो सकते हैं।
गैलेक्सी एवं ब्रह्मांड की संरचना
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गैलेक्टिक सेंटर: स्पिट्ज़र ने हमारी मिल्की वे समेत गैलेक्सियों के केंद्रों को देखा और वहां छुपे सुपरमैसिव ब्लैक होल और सर्पिल बाहुओं की जटिल बनावट बताई।
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दूरस्थ गैलेक्सियों की खोज: स्पिट्ज़र ने अब तक देखी गई सबसे दूरवर्ती गैलेक्सियों में से कुछ को पहचाना—हमें ब्रह्मांड के किनारों तक पहुंचाया।
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सुपरनोवा के अवशेष: स्पिट्ज़र की तस्वीरों में फटे हुए तारों से निकले धूल और गैस के नेटवर्क दिखाई दिए—जिनसे भारी तत्व पूरे ब्रह्मांड में फैलते हैं।
हमारा सौरमंडल
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धूमकेतु की पूंछ: स्पिट्ज़र ने धूमकेतु की पूंछ की बनावट, गठन और उनकी रचना का पता लगाया—जो प्रारंभिक सौरमंडल का रहस्य खोलती है।
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शनि का विशालकाय वलय: स्पिट्ज़र ने शनि के एक अदृश्य, विशालकाय वलय की खोज की—जो धरती से ना दिख सके, लेकिन ग्रह के व्यास से 300 गुना बड़ा था।
अद्भुत चित्र—अदृश्य में छुपी सुंदरता

स्पिट्ज़र की इन्फ्रारेड नजर ने जितनी वैज्ञानिक क्रांति लाई, उतनी ही उसने ब्रह्मांड की कलात्मक जटिलता भी उजागर की। रंगीन छवियों में छुपे धूल, आणविक बादल, और गैलेक्सी क्लस्टर—सबने हमें बताया कि अदृश्य में भी अकल्पनीय सुंदरता छुपी है।
क्रिएशन के पिलर्स और उससे आगे: हबल के साथ मिलकर, स्पिट्ज़र ने ईगल नेबुला तथा ओरियन नेबुला जैसी प्रसिद्ध नेबुलाओं का इन्फ्रारेड दृष्टिकोण दिया। जहां हबल ने धूल के स्तंभ दिखाए, वहीं स्पिट्ज़र ने उसमें छुपी गर्म धूल और नए सितारों के बनने के क्षेत्र उजागर किए।
डबल हेलिक्स नेबुला: स्पिट्ज़र ने हमारी गैलेक्सी के केंद्र के पास एक डबल-हेलिक्स, डीएनए जैसे पैटर्न वाली संरचना खोजी, जिसे आकाशगंगा के शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र ने आकार दिया है।
विरासत और प्रेरणा
स्पिट्ज़र के अनोखे थर्मल डिज़ाइन और पृथ्वी से दूर जाती कक्षा ने भविष्य के इन्फ्रारेड टेलीस्कोपों, जैसे जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप को मार्गदर्शन दिया। उसके डेटा आर्काइव में आज भी नई खोजें हो रही हैं।
2020 में लगभग 16 साल की सेवा के बाद नासा ने स्पिट्ज़र मिशन को बंद किया, लेकिन ब्रह्मांड के कई रहस्य उजागर कर चुका था |
स्पिट्ज़र ने हमें दिखाया कि ब्रह्मांड हमारी कल्पना से कहीं ज्यादा जीवंत, गतिशील और सुंदर है—हर दिशा में खोजने के लिए अद्भुत दुनिया हैं, जो हमारी आंखों से नहीं, बल्कि नई सोच और वैज्ञानिक औजारों से खुलती हैं।