6,000 एक्सोप्लैनेट्स: नई खोज की शुरुआत!

6,000 एक्सोप्लैनेट्स: नई खोज की शुरुआत!
An artist's illustration of the exoplanets NASA has found. (Image credit: NASA's Goddard Space Flight Center)

NASA ने पुष्टि की है कि अब हमारे पास 6,000 से अधिक एक्सोप्लैनेट्स (Exoplanets – सौर मंडल के बाहर के ग्रह) की सूची है!
तीस साल के भीतर एक्सोप्लैनेट्स की खोज इतनी तेज़ हुई है कि अब तीन साल में ही हमने एक हज़ार से अधिक नए ग्रह ढूंढ लिए।

एक्सोप्लैनेट्स: अद्भुत दुनिया

  • 1995 में 51 Pegasi b की खोज से यह खोज यात्रा शुरू हुई—वह पहला "नॉर्मल" एक्सोप्लैनेट था जो सूर्य जैसे तारे के चारों ओर घूमता मिला।

  • अब वैज्ञानिक कहते हैं, "हम अन्वेषण के अगले महान अध्याय में प्रवेश कर रहे हैं — ऐसी दुनिया जहाँ जीवन की तलाश है, जहाँ हमारे ब्रह्मांड में पड़ोसी मिल सकते हैं, और यह याद दिलाने के लिए कि ब्रह्मांड में अभी और भी दुनिया छुपी हैं।"

खोज की रफ्तार और तथ्‍य

  • नया आंकड़ा 17 सितंबर 2025 को सामने आया, जो लगभग उसी तारीख के आस-पास है जब पहली बार 51 Pegasi b की खोज घोषित की गई थी।

  • "6,000वाँ" ग्रह कोई एक विशिष्ट नहीं, बल्कि यह एक रोलिंग काउंट है — वैज्ञानिक नियमित रूप से दुनियाभर से नए उम्मीदवार ग्रह जोड़ते रहते हैं।

  • अभी 8,000+ और संभावित ग्रह (candidate planets) हैं, जो पुष्टि की प्रतीक्षा में हैं।

किस-किस तरह के ग्रह मिले?

  • 2,035 Neptune जैसे ग्रह — ये हमारे सौर मंडल के नेपच्यून/यूरेनस जैसे हैं, जिनका वातावरण हाइड्रोजन-हीलियम प्रधान होता है और अंदर चट्टान व भारी तत्व (metals) होते हैं।

  • 1,984 गैस जायंट्स — हमारे जुपिटर जैसे।

  • 1,761 सुपर-अर्थ — धरती से बड़े, नेपच्यून से हल्के, लेकिन "Earth 2.0" नहीं कहे जा सकते।

  • 700 स्थलीय ग्रह (terrestrial/rocky planets) — जो पथरीले हैं, पृथ्वी की तरह।

  • 7 "अज्ञात प्रकार" के ग्रह भी मिले!

Kepler, TESS और NASA का योगदान

  • 2,600+ ग्रह अब बंद हो चुके केप्लर स्पेस टेलीस्कोप से मिले।

  • TESS (Transiting Exoplanet Survey Satellite) ने 693 ग्रह खोजे।

  • हर ग्रह अपने-अपने ढंग से अलग और अनूठा है — कोई दोमुंहा लावा-विश्व, कोई अम्लीय बारिश वाला, कोई हीरों से बना ग्रह, तो कोई "नरक" जैसा गर्म और असामान्य!

वैज्ञानिक मायने

  • NASA के वैज्ञानिक डॉन जेलिनो कहती हैं:
    “हर नए ग्रह से हम यह अनुमान लगाते हैं कि पृथ्वी जैसे ग्रह कितने सामान्य हैं और हमें कहाँ देखना चाहिए कि क्या हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं या नहीं।”